दुर्गा पूजा से जुड़ी 11 परंपराएं व मान्यताएं | Facts And Traditions Related To Durga Puja In Hindi

हिन्दू धर्म में नवरात्रि को विशेष दर्जा दिया गया है। इस दौरान हर कोई मां दुर्गा की आराधना में लीन रहता है। इस पर्व को मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं। आखिर नवरात्रि का त्योहार मनाया क्यों जाता है, इससे जड़ी परंंपराएं और दुर्गा पूजा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य यहां जानें।

सबसे पहले जानते हैं कि नवरात्र क्यों मनाया जाता है।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

नवरात्रि देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कारणों से मनाई जाती है। यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा के जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के पश्चिमी भाग में गरबा और डांडिया के साथ धूमधाम से देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। दक्षिण भारत में इसे आयुध पूजा के नाम से जाना जाता है।

चलिए अब हम आपको दुर्गा पूजा से जुड़ी मान्यता और कुछ परंपराओं के बारे में बताते हैं।

दुर्गा पूजा से जुड़ी 10+ परंपराएं व मान्यताएं | Facts And Traditions Related To Durga Puja For Kids In Hindi

नवरात्रि का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे कई रोचक तथ्य और पारंपरिक मान्यताएं हैं। जानें दुर्गा पूजा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य व परंपराएं।

  1. 9 देवियों की पूजा - बताया जाता है कि मां दुर्गा जब महिषासुर का वध कर रही थी, तो हर दैत्य रूप को मारने में 9 दिन लगे थे। इसके लिए मां दुर्गा ने हर दिन अपना अलग रूप धारण किया और महिषासुर के सभी दैत्यों का अंत किया था। यही वजह है कि नवरात्रि 9 दिनों की होती है और हर दिन देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।
  1. मां दुर्गा की जन्म कहानी: पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महिषासुर नामक राक्षस ने जब स्वर्ग लोग पर अपना कब्जा जमा लिया था तब वहां के सभी देवता अपनी समस्या की गुहार लेकर ब्रह्म देव, भगवान विष्णु और शिव जी के पास पहुंचे।

देवताओं के कष्टों को सुनने के बाद तीनों भगवान ने अपने शरीर में मौजूद ऊर्जा से एक आकृति का निर्माण किया, जिसमें तीनों ने अपनी शक्तियां उसमें डालीं और फिर उन्हें अपने-अपने शस्त्र भी दिए। इसके बाद उस आकृति को मां दुर्गा का नाम दिया गया। इस प्रकार से मां दुर्गा का जन्म हुआ।

  1. मां की तीन आंखें : बताया जाता है कि भगवान शिव की तीन आंखें थी। मां दुर्गा को भी शिव का आधा रूप माना जाता है। यही वजह है कि मां दुर्गा की भी तीन आंखें हैं, जो सूर्य, चांद और अग्नि का प्रतीक हैं। इसलिए उन्हें त्र्यंबके भी कहा जाता है।
  1. 8 भुजाओं का कारण : मां दुर्गा को अष्ट भुजाओं वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है।  कुछ शास्त्रों में देवी दुर्गा के दस भुजाओं का जिक्र भी मिलता है। दरअसल, हमारे वास्तु शास्त्र में 8 दिशाओं का जिक्र मिलता है। जबकि, कुछ जगहों पर 10 दिशाओं का वर्णन भी है।

इनमें पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, उत्तर पूर्वी, दक्षिण पूर्वी, दक्षिण पश्चिमी, उत्तर पश्चिमी के अलावा, आकाश की ओर, पाताल की ओर की दिशाएं भी शामिल हैं। हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, मां दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा हर दिशा में करती है। यही वजह है कि मां दुर्गा की 8 भुजाएं हैं और उन्हें अष्ट भुजाओं की देवी कहा जाता है।

  1. शेर की सवारी का कारण : शेर को मां दुर्गा की सवारी कहा जाता है। इसके पीछे की मान्यता है कि शेर के पास अद्वितीय शक्ति होती है और मां दुर्गा उस पर सवार होकर सभी राक्षसों का अंत करती हैं।
  1. उपवास का महत्व : नवरात्रि में लोग मां दुर्गा की आराधना के लिए उपवास भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान व्रत रखने से तन, मन और आत्मा शुद्ध हो जाती है। यही वजह है कि लोग अपने शुद्धिकरण के लिए नवरात्र में उपवास रखकर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं।

ग्रंथों में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि नवरात्रि का व्रत रखने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। इसलिए कई लोग 9 दिन सिर्फ पानी पीकर रहते हैं, तो कुछ लोग सिर्फ फल खाकर। वहीं, कुछ लोग सिर्फ सात्विक भोजन ही करते हैं।

  1. मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी: मां दुर्गी की प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी गंगा नदी के किनारे से ली जाती है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत ही पावन माना जाता है और यही कारण है कि देवी मां की प्रतिमा के लिए गंगा की मिट्टी का उपयोग किया जाता है। गंगा नदी के किनारे की मिट्टी पुजारी के द्वारा लाई जाती है।
  1. 108 मंत्रों के जाप की मान्यता : दुर्गा पूजा को दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, जो कि नवरात्रि के अंतिम दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। बताया जाता है कि भगवान राम ने रावण से लड़ाई करने से पहले देवी दुर्गी की पूजा-अर्चना की थी।

    इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा को 108 नीलकमल अर्पित किए थे। तभी से 108 को एक शुभ अंक माना जाता है और यही वजह है कि दुर्गा पूजा में 108 मंत्रों का जाप किया जाता है।
  1. 9 कन्याओं का पूजन : हमारे देश में शुरू से ही कन्याओं को देवी का दर्जा दिया जाता रहा है। ऐसी मान्यता है कि कन्याओं के बाल रूप में साक्षात मां दुर्गा रहती हैं। विशेषकर तब तक, जब तक उनका मासिक धर्म शुरू नहीं होता।

    यही कारण है कि दुर्गा पूजा के नवमी के दिन 9 कन्याओं की पूजा की जाती है। इसके अलावा, देवी दुर्गा खुद में ऊर्जा की प्रतिक हैं, इसलिए कन्याओं को भी उन्हीं का रूप माना जाता है। इस वजह से भी नवरात्र के अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की जाती है।
  1. रावण दहन : नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके अंतिम दिन यानी दशहरा के दिन रावण को जलाया जाता है। दरअसल, इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। रावण को बुराई का प्रतीक माना गया है। ऐसे में माना जाता है कि दशहरा के दिन रावण का पुतला दहन कर लोग अपने अंदर के अहंकार, लालच, क्रोध और अन्य प्रकार की बुराई को भी नष्ट कर देते हैं।
  1. नवरात्र से जुड़ा वैज्ञानिक तथ्य : ऊपर बताई गई मान्यताओं के अलावा, दुर्गा पूजा से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। ऐसा बताया जाता है कि पृथ्वी जब सूर्य के चक्कर काटती है तो इसमें एक साल लगते हैं, जिसमें कुल 4 संधियां होती हैं।

    इनमें मार्च और सितंबर के महीने में पड़ने वाली संधियों में वर्ष का दो प्रमुख नवरात्रि का त्योहार पड़ता है। यह ऐसा समय होता है जब संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है। इस दौरान शरीर को स्वस्थ और शुद्ध रखने के लिए नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है।
  1. मां के मायके आने का राज : बंगाल में ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के समय देवी दुर्गा अपने बच्चों के साथ मायके आती हैं। इस वजह से भी इन दिनों को त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

अब जानते हैं दुर्गा पूजा के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

दुर्गा पूजा के दौरान बच्चों व बड़ों द्वारा किए जाने वाले कुछ नियम

नवरात्रि के दौरान कुछ खास बातों का ख्याल रखना जरूरी है। यहां हम नवरात्र के दौरान पालन करने वाले नियम की जानकारी दे रहे हैं। तो नवरात्रि के दौरान भूल से भी न करें ये गलतियां -

  1. बाल न काटें : मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान बाल नहीं काटने चाहिए। इसके अलावा, दाढ़ी-मूछ बनवाने से भी परहेज करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से देवी दुर्गा रूठ जाती हैं। इसलिए नवरात्रि के दौरान बाल कटाने से बचने की कोशिश करें। इसके अलावा, अगर माता-पिता अपने बच्चे का मुंडन इस दौरान आयोजित करना चाहते हैं, तो ऐसा न करें।
  1. नाखून काटने से बचें : दुर्गा पूजा के दौरान नाखून काटने से भी परहेज करना चाहिए। दरअसल, नवरात्रि के दौरान नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इसलिए, पूजा के दौरान नाखून न काटें। अगर संभव हो तो नवरात्र शुरू होने से पहले ही इस तरह के कार्य कर लें।
  1. कलश का अनादर न करें : नवरात्रि के दौरान जो लोग उपवास रखते हैं उनके घर में कलश की स्थापना की जाती है। इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जैसे - कलश को कभी भी अंधेरे में नहीं रखना चाहिए। इसके सामने हमेशा एक अखंड दीपक जलना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों को इसे जैसे-तैसे छूने से मना करें।
  1. काले कपड़े न पहनाएं : ऐसा माना जाता है कि काले रंग से देवी दुर्गा क्रोधित हो जाती हैं। इसलिए, इस त्योहार के दौरान 9 दिनों तक काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसकी जगह लाल, गुलाबी, पीला, केसरिया, आदि जैसे रंगों के कपड़े पहन सकते हैं।
  1. नॉन वेज न खाएं : नवरात्रि के दौरान नॉनवेज का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि मांस के सेवन से राक्षस और भूत-प्रेत की पूजा करने वाले लोगों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि नवरात्र  के दौरान नॉनवेज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, अगर वैज्ञानिक तथ्य देखा जाए तो मांसाहारी की तुलना में शाकाहारी लोग ज्यादा स्वस्थ रहते हैं (1)।
  1. दिन में सोने से बचें : अगर संभव हो तो नवरात्रि के दौरान दिन में सोने से बचें। खासकर तब जब घर में कलश स्थापना हुई हो। 

नवरात्र का पावन पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। इस दौरान लोग देवी दुर्गा की भक्ति में सराबोर रहते हैं। इस लेख में हमने नवरात्रि से जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताया है। शुभ नवरात्रि!

पंचतंत्र की कहानी : हाथी और गौरैया | Hathi Aur Goraiya in Hindi

सोमपुर के चौराहे पर एक पुराना पीपल का पेड़ था, उसपर एक गौरैया चिड़िया अपना घोंसला बनाकर पति गौरैया के साथ रहती थी। एक दिन गौरैया ने घोंसले में कुछ अंडे दिए। 

गौरैया को रोज अपने अंडों को सेकती थी। उसे उसने बच्चों के बाहर निकलने का बड़ा बेसब्री से इंतजार था। एक दिन अंड़ों को सेकते हुए गौरैया के पति ने उसे देखा। उसके मन में हुआ कि ये जबतक अंड़ों को सेक रही है, तबतक मैं खाने का कुछ इंतजाम करके आ जाता हूं। 

जैसे ही गौरैया का पति खाने लेने के लिए उड़ा वैसे ही एक पागल हाथी सोमपुर चौराहे की तरफ दौड़ते हुए बड़े। वो गुस्से में आसपास के सारे पेड़ तोड़ने लगा। उन्हीं पेड़ों में से एक वो पीपल का पेड़ भी था, जिसमें वो गौरैया रहती थी। 

हाथी उस पीपल के पेड़ को इतनी जोर से हिलाने लगा कि गौरैया का घोंसला गिर गया और गौरैया के सारे अंड़े फूट गए। अंडे से चूजों के निकलने का इंतजार कर रही गौरैया अब उनके फूटने का गम मनाने लगी। उसकी आंखें आंसू से भरी थीं। 

उसी समय गौरैया का पति वापस आया। उसने अपनी पत्नी को टूटे हुए अंड़ों के पास रोते हुए देखा। गौरैया ने अपने पति को हाथी के बारे में सबकुछ बता दिया। गुस्से में गौरैया के पति ने हाथी से बदला लेने की ठान ली।

गौरैया का पति अपने एक दोस्त के पास गया। वो कठफोड़वा नाम का पक्षी था। उसे गौरैया के पति ने अपने घोंसले और पत्नी की हालत सबकुछ बता दिया।

दोनों ने उस हाथी से बदला लेने की योजना बनाने की सोची। इस योजना में कठफोड़वा ने अपने दो दोस्त मधुमक्खी और मेंढक को भी शामिल कर लिया।

अपनी योजना के अनुसार, पहले मधुमक्खी उस हाथी के पास गई और उसके कान में गुनगुनाने लगी। हाथी को मधुमक्खी का संगीत अच्छा लगने लगा। हाथी आंखें बंद करके जहां खड़ा था वही लेट गया।

हाथी को आराम से लेटे हुए देखकर कठफोड़वा पक्षी ने हाथी की आंखें फोड़ दी। दर्द में हाथी करहाने लगा। उसके बाद मेंढक और उसके कुछ साथी थोड़ी दूर दलदल के पास से टर्र-टर्र करने लगे।

हाथी को लगा की मेंढक की आवाज आ रही है, तो हो सकता है कि पास में तलाब या नदी हो। इसी सोच के साथ हाथी मेंढक की आवाज वाली दिशा की तरफ बढ़ने लगा। हाथी की आंखें फूट चुकी थीं, इसलिए वो आगे अंदाजे से बढ़ रहा था और बढ़ते-बढ़ते तालाब में गिर गया। 

हाथी धीरे-धीरे दलदल में फंसते चला गया और थोड़ी ही देर में उसकी मौत गई। सभी दोस्तों का प्लान सफल हो गया और गौरैया के पति को बदला मिल गया

कहानी से सीख : कमजोर लोग भी एकजुट होकर ताकतवर लोगों को हराया जा सकता है।

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